ज्योति यार्राजी की कहानी किसी अख़बार की बड़ी हेडलाइन से शुरू नहीं होती. यह कहानी शुरू होती है एक साधारण घर से, एक साधारण शहर से, और एक ऐसे सपने से जिसे बोलने की हिम्मत भी हर कोई नहीं करता.
बचपन और शुरुआत
28 अगस्त 1999 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में जन्मी ज्योति का बचपन आम भारतीय बच्चों जैसा ही था. न घर में खेल का माहौल, न कोई बड़ा मार्गदर्शन. खेल उनके लिए करियर नहीं, बस एक स्वाभाविक झुकाव था.
स्कूल के दिनों में जब वह दौड़ती थीं, तब किसी को अंदाज़ा नहीं था कि यह लड़की एक दिन देश की पहचान बनेगी. उस वक्त दौड़ सिर्फ एक आदत थी, एक सुकून था.
ट्रेनिंग के साल: जहाँ कोई नहीं था
कॉलेज और शुरुआती ट्रेनिंग के समय ज्योति की जिंदगी का सबसे अहम लेकिन सबसे अनदेखा दौर शुरू हुआ.
कई दिन ऐसे थे जब वह स्टेडियम जाती थीं और वहाँ उनके अलावा कोई नहीं होता था.
न साथी एथलीट,न दर्शक,
न ताली.
वह अकेले हर्डल्स लगातीं, अकेले दौड़तीं, और अकेले ही खुद को सुधारतीं.यह वह समय था जब न जीत दिख रही थी, न भविष्य साफ था. बस एक सवाल था—क्या यह मेहनत सही दिशा में है?
संघर्ष जो दिखाई नहीं देता
इस सफर में चोटें आईं. कभी फॉर्म गिरा, कभी आत्मविश्वास.
पैसे और संसाधनों की कमी हमेशा साथ रही. कई बार ऐसा भी हुआ जब आगे बढ़ना मुश्किल लगा.
लेकिन ज्योति ने कभी खेल छोड़ने का शोर नहीं मचाया. उन्होंने बस अगली सुबह फिर ट्रैक पर पहुँचना चुना.
पहचान बनना शुरू हुई
धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाने लगी.
100 मीटर हर्डल्स में उनका समय लगातार बेहतर होने लगा. नेशनल लेवल पर उनका नाम दिखने लगा और फिर वह दिन आया जब उन्होंने इस इवेंट में भारत का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया.
यही वह मोड़ था जब खाली स्टेडियम की दौड़ देश की नजर में आने लगी.
अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियाँ
इसके बाद ज्योति ने पीछे मुड़कर नहीं देखा.
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एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2023 में 100 मीटर हर्डल्स में स्वर्ण पदक
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एशियन गेम्स 2023 (हांगझोउ) में रजत पदक
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कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण और रजत पदक
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पेरिस ओलंपिक 2024 के लिए क्वालिफिकेशन
ये पदक सिर्फ जीत नहीं थे, ये उन सालों का जवाब थे जब वह अकेले दौड़ा करती थीं.
अवॉर्ड और सम्मान
उनकी उपलब्धियों को औपचारिक पहचान भी मिली:
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अर्जुन पुरस्कार (2023) – भारत सरकार द्वारा
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आंध्र प्रदेश सरकार और भारतीय एथलेटिक्स महासंघ से कई सम्मान
ये अवॉर्ड उस संघर्ष की मुहर थे जो कैमरों से दूर लड़ा गया.
आज की ज्योति
आज ज्योति यार्राजी भारत की सबसे भरोसेमंद महिला हर्डल एथलीट्स में गिनी जाती हैं.
लेकिन उनकी असली पहचान सिर्फ मेडल नहीं हैं.
उनकी असली पहचान वह लड़की है जो तब भी दौड़ती रही जब देखने वाला कोई नहीं था.
कहानी का सार
ज्योति यार्राजी की जिंदगी यह सिखाती है कि हर बड़ी जीत से पहले एक लंबा, शांत और अकेला रास्ता होता है. और जो इंसान उस रास्ते पर रुकता नहीं, इतिहास आखिरकार उसी का नाम लिखता है. यह कहानी जीत की नहीं, लगातार चलते रहने की कहानी है.
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